कहानी नं. 1 · स्वीडन और केन्या
दो महाद्वीप पार करने वाले 15 डॉलर
- देश
- स्वीडन और केन्या (स्टॉकहोम से गिथुंगुरी)
- कौन
- हिल्डे बैक, एक प्रीस्कूल शिक्षिका, और क्रिस म्बुरु, वह लड़का जिसकी पढ़ाई का खर्च उन्होंने उठाया
- कब
- 1938 से 2021
कहानी
1938 में जर्मनी के गेल्सेनकिर्चेन शहर में एक किशोर लड़की से कहा गया कि अब वह स्कूल नहीं जा सकती। वजह यह थी कि वह यहूदी थी। उसका नाम था हिल्डे बैक।
जनवरी 1940 में वह एक शरणार्थी के रूप में स्वीडन पहुँची। उसके माता-पिता होलोकॉस्ट में नहीं बच पाए। उन्हें थेरेसिएनस्टाट और ऑशविट्ज़ के कैंपों में मार दिया गया।
हिल्डे स्वीडन में ही रहीं और प्रीस्कूल शिक्षिका बनीं। बाद में उन्होंने दूसरे प्रीस्कूल शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया। करीब 35 साल वे स्टॉकहोम के एक ही अपार्टमेंट में रहीं।
बाद में वे एक ऐसी योजना से जुड़ीं जिसमें शिक्षक केन्या के बच्चों की मदद करते थे। वे हर महीने लगभग 15 डॉलर देती थीं, और उस बच्चे से वे कभी नहीं मिलीं। उन पर बनी फ़िल्म में वे कहती हैं कि यह समुद्र में एक बूँद जैसा लगता था। वे कभी-कभी सोचती थीं कि इससे कोई फ़र्क पड़ता भी है या नहीं। फिर भी वे पैसे भेजती रहीं।
फ़िल्म में वे इसकी वजह बताती हैं। जब वे स्वीडन आई थीं, तब किसी ने उनकी भी मदद की थी।
उधर, केन्या के एक गाँव में
वह बच्चा था क्रिस म्बुरु, गिथुंगुरी के पास के एक गाँव का लड़का। वह मिट्टी के घर में बड़ा हुआ। सेकेंडरी स्कूल मुफ़्त नहीं था, और उसके इलाके के ज़्यादातर परिवार उसका खर्च नहीं उठा सकते थे। एक बार तो फ़ीस न भरने की वजह से उसे प्राइमरी स्कूल से निकालने की धमकी भी मिली थी।
हिल्डे के पैसों से वह प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी के आख़िर तक स्कूल में टिका रहा। वह बहुत अच्छा विद्यार्थी था। वह नैरोबी विश्वविद्यालय गया और 1990 में ग्रेजुएट हुआ। फिर उसे हार्वर्ड लॉ स्कूल में दाख़िला मिला।
वे उसके लिए “एक फ़रिश्ता थीं, जो मेरी ज़िंदगी में आईं और उसे सँवार दिया।”क्रिस म्बुरु, JTA के अनुसार
म्बुरु संयुक्त राष्ट्र से जुड़े और मानवाधिकारों पर काम किया। उनके काम में नरसंहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों की जाँच भी शामिल थी। जिस महिला ने उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया था, उसने अपने माता-पिता को नरसंहार में खोया था।
तलाश
2001 के आसपास म्बुरु ने अपने इलाके के बच्चों के लिए एक छोटा छात्रवृत्ति कोष शुरू किया। उन्होंने उसका नाम रखा हिल्डे बैक एजुकेशन फ़ंड। हिल्डे से उनका संपर्क टूट चुका था, और उन्होंने कभी आमने-सामने उनका शुक्रिया नहीं किया था।
इसलिए वे उन्हें ढूँढने निकले। दोनों देशों के लोगों की मदद से उन्होंने हिल्डे को स्वीडन में ढूँढ लिया। कुछ समय बाद वे नैरोबी हवाई अड्डे के आगमन हॉल में खड़े थे, हाथ में हिल्डे के नाम की तख़्ती लिए।
- ~$15हर महीने, कई सालों तक
- 2001उनके नाम पर कोष की शुरुआत
- 98निधन के समय हिल्डे की उम्र
तब तक हिल्डे अस्सी से ज़्यादा उम्र की हो चुकी थीं। म्बुरु के गाँव में एक गायक मंडली, दावत और पारंपरिक पोशाकों से उनका स्वागत हुआ। उन्हें किकुयू समुदाय की मानद बुज़ुर्ग बनाया गया। फिर भी वे यही कहती रहीं कि उनका दान छोटा-सा था। म्बुरु ने उन्हें अपनी दूसरी माँ कहा।
यह कहानी जेनिफ़र आर्नोल्ड की डॉक्यूमेंट्री A Small Act के ज़रिए और बहुत लोगों तक पहुँची। इसका प्रीमियर 2010 में सनडांस फ़िल्म फ़ेस्टिवल में हुआ। फ़िल्म इसकी सीमाओं के बारे में भी ईमानदार है। सिर्फ़ दस छात्रवृत्तियाँ थीं, और फ़िल्म में दिखाए गए तीन में से दो बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिली।
हिल्डे बैक का निधन 2021 की शुरुआत में 98 साल की उम्र में हुआ।
कब क्या हुआ
- जर्मनी में हिल्डे को स्कूल से रोक दिया जाता है।
- वे शरणार्थी के रूप में स्वीडन पहुँचती हैं।
- क्रिस नैरोबी विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट होते हैं।
- हिल्डे बैक एजुकेशन फ़ंड शुरू होता है।
- सनडांस में A Small Act का प्रीमियर।
- 98 साल की उम्र में हिल्डे का निधन।
यह कहानी ख़ास क्यों है
ज़्यादातर प्रेरक कहानियाँ उन लोगों की होती हैं जिन्होंने कुछ बहुत बड़ा किया। यह कहानी एक ऐसे छोटे दान की है जिस पर देने वाली का ध्यान भी मुश्किल से जाता था। हिल्डे को कभी पता नहीं था कि पैसा कहाँ गया। म्बुरु को कभी पता नहीं था कि वे कौन थीं।
हम क्या सीख सकते हैं
छोटे दान को अपने-आप चलने दें
हिल्डे को शक था कि उनके दान से कोई फ़र्क पड़ता है, फिर भी वे महीने-दर-महीने देती रहीं।
यह आज़माएँ: इस हफ़्ते किसी नेक उद्देश्य या किसी इंसान के लिए एक छोटा मासिक ऑटो-ट्रांसफ़र शुरू करें।
जो मदद मिली, उसे आगे बढ़ाएँ
हिल्डे ने इसलिए दिया क्योंकि उनकी भी मदद हुई थी।
यह आज़माएँ: उन दो लोगों के नाम लिखें जिन्होंने मुश्किल समय में आपकी मदद की। आज वैसी ही हालत में किसी के लिए एक ठोस काम करें।
शुक्रिया को एक व्यवस्था बना दें
म्बुरु ने सिर्फ़ धन्यवाद नहीं कहा। उन्होंने एक कोष बनाया जो साल-दर-साल चलता है।
यह आज़माएँ: अगर आप कोई कारोबार या टीम चलाते हैं, तो किसी एक भले काम को हर बार होने वाली प्रक्रिया बना दें।
किसी को बताएँ कि उनकी मदद से क्या हुआ
जब तक म्बुरु ने हिल्डे को नहीं ढूँढा, उन्हें पता ही नहीं था कि उनका पैसा क्या बन गया।
यह आज़माएँ: जिसने आपकी राह बदली, उसे एक संदेश भेजें। बताएँ कि आज आप उनकी वजह से क्या कर रहे हैं।
असली रुकावट ढूँढें
म्बुरु के लिए रुकावट थी स्कूल की फ़ीस।
यह आज़माएँ: जिसकी आप मदद करना चाहते हैं, उससे पूछें कि ठीक-ठीक क्या चीज़ उन्हें रोक रही है।
आप शायद ही कभी देख पाएँगे कि कोई छोटी-सी भलाई कहाँ तक पहुँचती है। फिर भी उसे कीजिए।
स्रोत (अंग्रेज़ी में)
- Roger EbertReview of A Small Act
- Daily Nation (Kenya)She fled Nazis, lived to help poor
- Harvard Law SchoolA Small Act Multiplied
- JTAReview of A Small Act
तथ्य-जाँच नोट: खबरों में मासिक दान की रकम लगभग 11 से 15 डॉलर बताई गई है, और हिल्डे के निधन की सही तारीख़ को लेकर स्रोतों में थोड़ा अंतर है। “हमारी राय” वाली पंक्तियाँ हमारी अपनी व्याख्या हैं। बाकी सब ऊपर दिए स्रोतों से है।
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