कहानी नं. 8 · भारत
वह कुम्हार जिसके फ्रिज को बिजली नहीं चाहिए
- देश
- भारत (वांकानेर, गुजरात)
- कौन
- मनसुखभाई प्रजापति, वांकानेर के एक कुम्हार और आविष्कारक
- कब
- 1979 से 2022
कहानी
मनसुखभाई प्रजापति भारत के गुजरात में एक कुम्हार परिवार में पले-बढ़े। 1979 में मोरबी शहर में एक बाँध टूट गया। उनके परिवार का सब कुछ चला गया और वे वांकानेर आ बसे।
पैसे कमाने के लिए उन्होंने दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। बाईं आँख में चोट लगी, तो वे आठ महीने से ज़्यादा काम पर नहीं जा सके। फिर उन्होंने चाय की एक दुकान खोली, जो छह महीने में बंद हो गई।
टाइल प्रेस
1985 में वे छत की टाइलें बनाने वाली एक छोटी फ़ैक्टरी में लगे। तनख़्वाह थी महीने के 300 रुपये। उन्होंने देखा कि टाइलें बड़ी संख्या में दबाकर बनाई जाती हैं। तब उन्होंने एक सीधा-सा सवाल पूछा। रोटी के लिए मिट्टी के तवे भी इसी तरह क्यों न बनाए जाएँ?
1988 में उन्होंने एक साहूकार से 30,000 रुपये उधार लिए। उन्होंने एक टाइल प्रेस को तवे बनाने वाले प्रेस में बदल दिया। पहले दिन उन्होंने 50 तवे बनाए। उन्हें साइकिल पर बाँधकर वे आस-पास के गाँवों में बेच आए।
शुरू में तवे आग पर चटक जाते थे, और ग्राहक शिकायत करते थे। उन्होंने मिट्टी के कई मिश्रण आज़माए, जब तक तवे टिकने नहीं लगे। धीरे-धीरे उनका काम बढ़ने लगा।
टूटा हुआ फ्रिज
जनवरी 2001 में गुजरात में एक भारी भूकंप आया। उनका ज़्यादातर माल टूट गया। जो बर्तन बच गए, वे उन्होंने कच्छ के भूकंप पीड़ितों को दे दिए।
एक महीने बाद एक अख़बार में उनके टूटे पानी के फ़िल्टर की तस्वीर छपी। तस्वीर के नीचे के कैप्शन में उसे ग़रीब का टूटा हुआ फ्रिज कहा गया था। ये शब्द उनके मन में बैठ गए। क्या वे मिट्टी से सचमुच का फ्रिज बना सकते थे, जिसे बिजली की ज़रूरत न पड़े?
ग़रीब का टूटा हुआ फ्रिजअख़बार का कैप्शन, फ़रवरी 2001, नेशनल इनोवेशन फ़ाउंडेशन के अनुसार
- 30,0001988 में उधार लिए गए रुपये
- 3 सालमिट्टी और डिज़ाइन की जाँच में
- 4–5°Cअंदर, कमरे से ज़्यादा ठंडा
यह कैसे काम करता है
उन्होंने 2002 में काम शुरू किया। उन्होंने कई तरह की मिट्टी और कई डिज़ाइन आज़माए। इसमें तीन साल लग गए।
फ्रिज का नाम है मिट्टीकूल। यानी मिट्टी की ठंडक। ऊपर एक टंकी में पानी रहता है। वह मिट्टी से रिसकर सतह पर सूख जाता है। इससे डिब्बे के अंदर की गर्मी खिंच जाती है। बिजली की ज़रूरत नहीं पड़ती।
जाँच में पता चला कि अंदर का तापमान कमरे से 4 से 5 डिग्री कम रहता है। धनिया 4 दिन ताज़ा रहा, जबकि सामान्य तौर पर वह लगभग 2 दिन चलता है।
2005 में एक सिविल इंजीनियर ने यह फ्रिज देखा। उसने 100 फ्रिज का ऑर्डर दिया और 200,000 रुपये पेशगी भी दे दिए।
आगे चलकर उन्होंने नॉन-स्टिक मिट्टी का तवा, मिट्टी का कुकर और भी बहुत कुछ बनाया। 2022 में जमनालाल बजाज फ़ाउंडेशन ने उन्हें ग्रामीण विज्ञान के लिए पुरस्कार दिया। फ़ाउंडेशन के अनुसार, उनकी इकाई में 1,000 से ज़्यादा औरतों ने काम किया है।
कब क्या हुआ
- मोरबी में बाँध टूटा। परिवार वांकानेर आ गया।
- उन्होंने मिट्टी के तवे बनाने का अपना काम शुरू किया।
- भूकंप में उनका ज़्यादातर माल टूट गया।
- मिट्टीकूल फ्रिज तैयार हुआ।
- उन्हें जमनालाल बजाज पुरस्कार मिला।
यह कहानी ख़ास क्यों है
ज़्यादातर आविष्कारक प्रयोगशाला से शुरू करते हैं। उन्होंने दसवीं के बाद स्कूल छोड़ा और छत की टाइल फ़ैक्टरी से शुरुआत की। उनका सबसे अच्छा विचार अख़बार की एक पंक्ति से शुरू हुआ, जो उन्हीं के नुक़सान के बारे में थी।
यह एक हुनर की कहानी भी है। उनके काम ने कुम्हारों को मिट्टी के साथ काम करते रहने की एक नई वजह दी। जमनालाल बजाज फ़ाउंडेशन के अनुसार, उनके तवा-प्रेस की वजह से हज़ारों कुम्हार अपने पुराने काम में लौट आए।
हम क्या सीख सकते हैं
किसी और धंधे का तरीक़ा उधार लीजिए
उन्होंने टाइलों को बड़ी संख्या में दबकर बनते देखा और वही तरीक़ा मिट्टी के तवों पर आज़माया।
यह आज़माएँ: किसी दूसरे क्षेत्र का एक औज़ार चुनिए, जो आपकी किसी समस्या को हल कर सके।
हार को एक इशारा समझिए
उनके टूटे फ़िल्टर पर लिखी एक पंक्ति से फ्रिज का विचार शुरू हुआ।
यह आज़माएँ: हाल की एक हार लिखिए, और यह भी कि वह कौन-सा सवाल उठाती है।
तब तक जाँचते रहिए जब तक चल न पड़े
फ्रिज तैयार होने से पहले उन्होंने तीन साल मिट्टी और डिज़ाइन की जाँच की।
यह आज़माएँ: इस हफ़्ते अपने विचार की एक छोटी, सस्ती जाँच कीजिए।
किसी जानकार से जँचवाइए
एक नवाचार नेटवर्क, GIAN, ने फ्रिज की जाँच की और डिज़ाइन सुधारने में मदद की।
यह आज़माएँ: किसी जानकार से अपने काम का एक हिस्सा जँचवाइए।
एक नुक़सान में अगला विचार छिपा हो सकता है।
स्रोत (अंग्रेज़ी में)
- National Innovation Foundation (India)Earthen kitchen products: Mansukhbhai Prajapati
- Jamnalal Bajaj FoundationMansukhbhai Prajapati: Award for Application of Science and Technology for Rural Development, 2022
- Aim2FlourishWheels of fortune: molding lives with a potful of ecofriendly innovations
- Technology Exchange LabMittiCool Refrigerator
तथ्य-जाँच नोट: कुछ बातों पर स्रोतों में मतभेद है। कहा जाता है कि उनका पहला तवा-प्रेस रोज़ 600 (Aim2Flourish), 700 (NIF) या 3,500 से 4,000 (जमनालाल बजाज फ़ाउंडेशन) तवे बनाता था, इसलिए कहानी में रोज़ का कोई आँकड़ा नहीं दिया गया। NIF के अनुसार उनके पिता कुम्हार थे और बाँध टूटने के बाद राजमिस्त्री बन गए। Aim2Flourish के अनुसार उनके पिता धातु की फ़ैक्टरी में काम करते थे। कहानी बस इतना कहती है कि वे कुम्हार परिवार में पले-बढ़े। फ्रिज की प्रेरणा फ़रवरी 2001 में छपी एक अख़बारी पंक्ति (NIF) से मिली। Aim2Flourish उसे सुर्ख़ी की तरह लिखता है, इसलिए पंक्ति वैसे ही ली गई है जैसे NIF देता है। NIF के अनुसार चाय की दुकान एक छोटा प्रयास थी, जो छह महीने में बंद हो गई; दूसरे पन्ने कहते हैं कि वे चाय की दुकान पर काम करते थे। जाँच के नतीजे NIF की पुरानी प्रोफ़ाइल से हैं और अब पुराने हो सकते हैं। “हमारी राय” वाली पंक्तियाँ हमारी अपनी व्याख्या हैं। बाकी सब ऊपर दिए स्रोतों से है।
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