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कहानी नं. 3 · जापान

हवा से बात करने वाला फ़ोन

जापान में एक माली ने पहाड़ी पर बिना तारों वाला एक फ़ोन रखा। फिर 30,000 से ज़्यादा लोग उसे इस्तेमाल करने आए।

8 अक्टूबर 2026 · 4 मिनट में पढ़ें

देश
जापान (ओत्सुची, इवाते)
कौन
इतारु सासाकी, एक बाग़ डिज़ाइनर, और उनके बाग़ में आने वाले हज़ारों लोग
कब
2010 से आज तक

कहानी

ओत्सुची जापान के उत्तर-पूर्वी तट पर मछुआरों का एक छोटा शहर है, टोक्यो से लगभग 500 किमी दूर। खाड़ी के ऊपर एक पहाड़ी पर इतारु सासाकी नाम के एक आदमी एक बड़े बाग़ की देखभाल करते हैं। बाग़ डिज़ाइन करना ही उनका काम है।

2010 में उनके चचेरे भाई की कैंसर से मौत हो गई। सासाकी जैसे वहीं अटक गए। उन्हें उनकी बातचीत याद आती थी, और अभी भी कुछ बातें थीं जो वे कहना चाहते थे।

तो उन्होंने कुछ थोड़ा अजीब किया। उन्होंने अपने बाग़ में एक पुराना सफ़ेद फ़ोन बूथ लगाया। उसके अंदर घुमाने वाले डायल का एक काला फ़ोन रखा। वह किसी चीज़ से जुड़ा नहीं था।

उन्होंने कहा कि उनके शब्द आम फ़ोन लाइन से नहीं जा सकते थे, इसलिए वे चाहते थे कि उनके शब्द “हवा के साथ पहुँचें।”इतारु सासाकी, जापान के NHK से

उन्होंने इसका नाम रखा काज़े नो देनवा: हवा का फ़ोन। कुछ महीनों तक बस सासाकी थे, बूथ था, और समुद्र था।

फिर लहर आई

11 मार्च 2011 को जापान में एक बहुत बड़ा भूकंप आया, और उसके बाद सुनामी। ओत्सुची लगभग मिट गया। शहर के हर दस में से करीब एक इंसान की मौत हो गई या वह लापता हो गया।

हज़ारों परिवारों ने बिना किसी चेतावनी के किसी अपने को खो दिया। बहुतों को कभी शव नहीं मिला। बहुत लोग कभी अलविदा नहीं कह पाए।

सासाकी यह एहसास जानते थे। उन्होंने अपना बाग़ हर उस इंसान के लिए खोल दिया जो फ़ोन इस्तेमाल करना चाहता था। उन्होंने उसके पास एक नोटबुक रख दी, ताकि लोग बोलने के साथ लिख भी सकें।

कहीं न जाने वाली कॉल

लोग आने लगे। पहले ओत्सुची से, फिर पूरे जापान से। कुछ लोग घंटों गाड़ी चलाकर आए। वे अंदर जाते, दरवाज़ा बंद करते, और वह नंबर घुमाते जो उन्हें ज़ुबानी याद था।

उनमें से एक थे काज़ुयोशी सासाकी, एक स्थानीय पार्षद। उनकी पत्नी मिवाको सुनामी में मारी गई थीं। जब रॉयटर्स के पत्रकार वहाँ गए, तो उन्होंने पत्नी का पुराना मोबाइल नंबर मिलाया।

उन्होंने कोई भाषण नहीं दिया। उन्होंने रोज़मर्रा की खबरें सुनाईं। आख़िरकार वे अस्थायी घर से निकल आए थे। उनका सबसे छोटा बेटा एक नया घर बना रहा था, जहाँ वे पोते-पोतियों के साथ रह सकेंगे।

फ़ोन रखने से पहले उन्होंने बताया कि सेहत की जाँच में उनका वज़न कम निकला है। फिर उन्होंने वादा किया कि वे अपना ख़याल रखेंगे।

  • 0तार जो फ़ोन को जोड़ते हैं
  • 10 में 1ओत्सुची के लोग, जो 2011 में खो गए
  • 30k+लोग यहाँ आ चुके हैं

दुनिया भर में पहुँचा एक बूथ

2017 तक कम से कम 25,000 लोग यहाँ आ चुके थे। बाद की गिनती में यह संख्या 30,000 से ऊपर बताई गई। नोटबुकें एक के बाद एक भरती गईं।

जापान के प्रसारक NHK ने बूथ के अंदर लोगों को फ़िल्माया। 2016 में अमेरिकी रेडियो शो This American Life ने यह कहानी सुनाई। 2020 में इस पर एक फ़ीचर फ़िल्म, Voices in the Wind, बनी।

आज दूसरे देशों में भी लोगों ने अपने हवा वाले फ़ोन बनाए हैं। दुख सहने का एक आदमी का निजी तरीका हर जगह अजनबियों के लिए एक तोहफ़ा बन गया।

कब क्या हुआ

  1. सासाकी के चचेरे भाई का निधन। साल के आख़िर में वे बूथ लगाते हैं।
  2. ओत्सुची में सुनामी आती है। वे बाग़ सबके लिए खोल देते हैं।
  3. This American Life यह कहानी विदेश तक पहुँचाता है।
  4. कम से कम 25,000 लोग आ चुके। सासाकी फ़ोन पर एक किताब छापते हैं।
  5. फ़िल्म Voices in the Wind रिलीज़ होती है।
  6. 30,000 से ज़्यादा लोग आ चुके, और दूसरे देशों में भी हवा वाले फ़ोन।

यह कहानी ख़ास क्यों है

इस कहानी में किसी को भी उसका अपना वापस नहीं मिला। कुछ भी ठीक नहीं हुआ। यही बात इसे अनोखा बनाती है।

हमारी रायफ़ोन तकनीकी रूप से कुछ नहीं करता। यह इसलिए काम करता है क्योंकि यह लोगों को तीन चीज़ें देता है: एक निजी जगह, ज़ोर से बोलने की एक वजह, और वह कहने की इजाज़त जो वे कभी कह नहीं पाए।

हम क्या सीख सकते हैं

अपनी भावनाओं को एक जगह दें

सासाकी ने “इससे उबरने” का इंतज़ार नहीं किया। उन्होंने एक छोटी-सी रस्म बनाई जिससे वे बात करते रह सकें।

यह आज़माएँ: किसी ऐसे इंसान को एक छोटी चिट्ठी लिखें जिसे आपने खो दिया या जिससे दूरी हो गई। उसे भेजना ज़रूरी नहीं।

जिस चीज़ से आपको मदद मिली, उसे बाँटें

बूथ एक निजी साधन के रूप में शुरू हुआ था। उसका सबसे बड़ा असर तब हुआ जब उन्होंने अजनबियों के लिए दरवाज़ा खोला।

यह आज़माएँ: उस एक चीज़ का नाम लें जिसने आपको मुश्किल समय से निकाला। इस हफ़्ते किसी एक दोस्त को उसके बारे में बताएँ।

सादगी महँगी चीज़ों से जीत सकती है

न कोई ऐप, न कोई बजट, न कोई तार। एक पुराने बूथ और एक नोटबुक ने हज़ारों लोगों की मदद की।

यह आज़माएँ: काम या घर की अगली समस्या पर पूछें: इसका सबसे सरल भौतिक रूप क्या होगा?

छोटी बातें कह दें, जब तक वक़्त है

फ़ोन करने वालों ने रोज़ की खबरें बताईं: एक नया घर, सेहत की जाँच। यही छोटी बातें उन्हें सबसे ज़्यादा याद आती थीं।

यह आज़माएँ: आज किसी को सिर्फ़ एक आम-सी खबर बताने के लिए फ़ोन करें। पाँच मिनट काफ़ी हैं।

साथ ले जाने वाली एक बात

कुछ नुकसान ठीक नहीं हो सकते। पर किसी को भी सुने जाने की एक जगह दी जा सकती है।

स्रोत (अंग्रेज़ी में)

तथ्य-जाँच नोट: आने वालों की गिनती साल के हिसाब से अलग है: 2017 तक कम से कम 25,000, और बाद की खबरों में 30,000 से ज़्यादा। “हमारी राय” वाली पंक्तियाँ हमारी अपनी व्याख्या हैं। बाकी सब ऊपर दिए स्रोतों से है।

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