कहानी नं. 10 · न्यूज़ीलैंड
पाँच नन्ही चिड़ियाँ, जो लौट आईं
- देश
- न्यूज़ीलैंड (चैथम द्वीप समूह)
- कौन
- डॉन मर्टन और वन्यजीव दल, जिसने ब्लैक रॉबिन को बचाया
- कब
- 1976 से 2022
कहानी
चैथम द्वीप समूह प्रशांत महासागर में, न्यूज़ीलैंड के पूरब में, बहुत दूर हैं। ब्लैक रॉबिन नाम की एक छोटी चिड़िया सिर्फ़ वहीं रहती है। चूहों और बिल्लियों ने उसे उसके ज़्यादातर द्वीपों से मिटा दिया।
1970 के दशक तक आख़िरी कुछ रॉबिन लिटिल मैंगेरे नाम की एक छोटी-सी चट्टान पर रहते थे। वहाँ के पेड़ मर रहे थे। 1976 में सिर्फ़ सात रॉबिन बचे थे। वन्यजीव अधिकारियों ने उन्हें एक बड़े द्वीप, मैंगेरे, पर पहुँचाया, जहाँ 100,000 से ज़्यादा पेड़ लगाए जा चुके थे।
यह काफ़ी नहीं था। 1980 तक सिर्फ़ पाँच रॉबिन बचे। सिर्फ़ एक जोड़ा बच्चे पैदा कर सकता था। मादा का नाम था ओल्ड ब्लू। उसके साथी का नाम था ओल्ड येलो।
एक साहसी योजना
बचाव का नेतृत्व न्यूज़ीलैंड वन्यजीव सेवा के डॉन मर्टन ने किया। ब्लैक रॉबिन एक बार में सिर्फ़ दो अंडे देती है। उन्होंने एक नया विचार रखा। दल अंडे लेकर किसी दूसरी चिड़िया के घोंसले में रख देगा। इसे क्रॉस-फ़ॉस्टरिंग कहते हैं।
तब रॉबिन फिर से अंडे देतीं। एक जोड़ा एक मौसम में दो परिवार पाल सकता था।
शुरू में पालने वाले माँ-बाप वार्बलर थे। उन्होंने अंडे सेए। पर वे बच्चों को दस दिन से आगे नहीं पाल सके। 1981 में दल को हल मिल गया। टॉमटिट, जो रॉबिन के क़रीबी रिश्तेदार हैं, बच्चों को तब तक पाल सकीं जब तक वे अपने बल पर जीने लायक़ न हो गए।
ब्लैक रॉबिन और न्यूज़ीलैंड की दूसरी प्रजातियों को बचाने के लिए अपनाए गए तरीक़ों ने पूरे प्रशांत क्षेत्र को प्रेरणा दी है।एलेक्स बेरीमैन, बर्डलाइफ़, 2023
- 51980 में बचे पक्षी
- 1301991 तक पक्षी
- ~300आज पक्षी
गरजती हवाओं में एक नाव
टॉमटिट दूसरे द्वीप पर रहती थीं, जो 15 किलोमीटर दूर था। इसलिए दल अंडे नाव से वहाँ ले जाता था। उन्होंने अंडों को गरम रखने के लिए साथ ले जाने लायक़ एक इन्क्यूबेटर बनाया। तेज़ हवाएँ अक्सर सफ़र रोक देती थीं, और द्वीपों पर कोई हेलिकॉप्टर तैनात नहीं था।
स्थानीय मछुआरों ने हर सफ़र मुमकिन किया। इन सालों में दल ने द्वीपों के बीच लगभग 40 अंडे, 10 चूज़े और 25 दूसरे पक्षी पहुँचाए। उनमें से एक भी नहीं खोया।
1983 में रॉबिनों को साउथ ईस्ट द्वीप पर नया घर मिला। वह कहीं बड़ा द्वीप था, जहाँ बढ़ने की जगह थी।
1985 तक 38 रॉबिन हो गए। 1991 तक लगभग 130। आज लगभग 300 हैं। उनमें से हर एक ओल्ड ब्लू की संतान है।
2022 में ब्लैक रॉबिन संकटग्रस्त प्रजातियों की विश्व सूची में “लुप्तप्राय” से “असुरक्षित” श्रेणी में आ गई। वह अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। चूहे या बिल्लियाँ अब भी इन द्वीपों तक पहुँच सकते हैं। और सारे पक्षी आपस में बहुत क़रीबी रिश्तेदार हैं।
कब क्या हुआ
- सात रॉबिन मैंगेरे द्वीप पर पहुँचाए गए।
- सिर्फ़ पाँच रॉबिन बचे।
- टॉमटिट ने दिखाया कि वे रॉबिन के चूज़े पाल सकती हैं।
- रॉबिन साउथ ईस्ट द्वीप पर बसे।
- विश्व सूची में रॉबिन “असुरक्षित” श्रेणी में आ गई।
यह कहानी ख़ास क्यों है
ज़्यादातर बचाव अभियान जो बचा है उसकी रखवाली करते हैं। इस अभियान ने चिड़ियों से साल में दो परिवार पलवाए। इसमें कई हाथ लगे, वन्यजीव अधिकारियों से लेकर स्थानीय मछुआरों तक।
आम लोगों ने भी मदद की। Forest & Bird संस्था के सदस्यों ने “एक पेड़ गोद लीजिए” अपील के ज़रिए पेड़ों के पैसे दिए। हर मददगार ने एक छोटा हिस्सा निभाया। सब हिस्से मिलकर बचाव बन गए।
हम क्या सीख सकते हैं
पहले छोटा क़दम परखिए
वार्बलर बच्चों को नहीं पाल सकीं। दल तब तक खोजता रहा जब तक टॉमटिट काम नहीं आईं।
यह आज़माएँ: बड़ा पैसा या समय लगाने से पहले अपनी योजना की एक छोटी जाँच कीजिए।
कई हाथों को जोड़िए
वन्यजीव अधिकारियों, दानदाताओं और मछुआरों, तीनों ने अपना-अपना काम किया।
यह आज़माएँ: लिखिए कि आपकी योजना को और किन लोगों की ज़रूरत है, और आज उनमें से एक से मदद माँगिए।
अपनी योजना को बढ़ने की जगह दीजिए
छोटे द्वीप पर रॉबिन नहीं बढ़ सके। बड़े द्वीप पर बढ़े।
यह आज़माएँ: एक ऐसी सीमा पहचानिए जो आपके काम को रोकती है, और उसे चौड़ा करने का एक तरीक़ा खोजिए।
लंबे समय की योजना बनाइए
पेड़ 1970 के दशक में लगाए गए। रॉबिन ख़तरे की सूची में नीचे सिर्फ़ 2022 में आई।
यह आज़माएँ: ऐसा एक लक्ष्य चुनिए जिसमें सालों लगेंगे, और लिखिए कि इस महीने आप उसके लिए क्या करेंगे।
पाँच पक्षी फिर से शुरुआत करने के लिए काफ़ी थे।
स्रोत (अंग्रेज़ी में)
- Forest & Bird (New Zealand)Hope in action
- BirdLife InternationalBlack is back: Next chapter in one of conservation’s great recovery stories
- Watchbird (American Federation of Aviculture)The Chatham Island Black Robin: How the world’s most endangered bird was saved from extinction, by Don Merton
तथ्य-जाँच नोट: स्रोत मुख्य कहानी पर एकमत हैं, पर ब्योरों में अलग हैं। डॉन मर्टन का अपना बयान (Watchbird, लगभग 1991 में लिखा) कहता है कि परियोजना उन्होंने चलाई; Forest & Bird कहता है कि बचाव ब्रायन बेल और उनके दल के ज़िम्मे था, जिसमें मर्टन भी थे। Forest & Bird पालने वाले माँ-बाप के रूप में वार्बलर और टॉमटिट का नाम लेता है; मर्टन कहते हैं कि वार्बलर दस दिन बाद नाकाम रहीं और 1981 से टिट सफल रहीं; BirdLife टॉमटिट कहता है। कहानी मर्टन के बयान का अनुसरण करती है। मैंगेरे पर लगाए गए पेड़ 120,000 (मर्टन, Forest & Bird) या 100,000 से ज़्यादा (BirdLife) बताए गए हैं, इसलिए कहानी में 100,000 से ज़्यादा लिखा है। 1985 में 38 रॉबिन (Forest & Bird) और 1991 में 130 (मर्टन) के आँकड़े हर एक एक ही स्रोत से हैं। आज लगभग 300 रॉबिन का आँकड़ा Forest & Bird और BirdLife (दोनों 2023) से है; दूसरी गिनतियाँ भी मौजूद हैं। मर्टन पर Te Ara की जीवनी खोली नहीं जा सकी। “हमारी राय” वाली पंक्तियाँ हमारी अपनी व्याख्या हैं। बाकी सब ऊपर दिए स्रोतों से है।
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